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मधुबन एजुकेशनल बुक्स विद्यालयी पुस्तकों के क्षेत्र में भारत के मुख्य प्रकाशकों
में से एक है। प्रकाशन के साथ-साथ हम शिक्षकों के प्रशिक्षण पर भी ध्यान देते हैं।
शिक्षण का अविभाज्य अंग होने के कारण विद्यालय भी सेवाकालीन प्रशिक्षण को विशेष महत्त्व
देते हैं। हमारे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अंतर्गत शिक्षकों को नई शिक्षण-विधियों (teaching
methodologies) , समय-समय पर हिंदी भाषा में आनेवाले परिवर्तनों, कंप्यूटर उपयुक्त
वर्तनी, व्याकरण और बोर्ड-परीक्षाओं के सिलेबस पर दिशा-निर्देश दिए जाते हैं तथा हिंदी
शिक्षण-संबंधी अन्य मुद्दों पर भी विचार करने का प्रयास किया जाता है।
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इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों से प्रोत्साहित होकर हमने वर्ष 2002 में ‘संबोधन’
नामक हिंदी मंच की स्थापना की। ‘संबोधन’ द्वारा भारत के विभिन्न शहरों और विदेशों
में प्रतिवर्ष अनेकानेक कार्यशालाओं का आयोजन किया जाता है। यह मंच हिंदी-शिक्षण-संबंधी
सभी समस्याओं के समाधान प्रस्तुत करने के प्रति पूर्णतया समर्पित है।
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मधुबन का अगला सशक्त कदम है, हिंदी भाषा के शिक्षकों के लिए ‘मधु संबोध’
नामक शैक्षिक-पत्रिका का प्रकाशन। यह पत्रिका ( 8 pages, 2 colour, size 15'' x 20''
) भारत और मध्य-पूर्व के कुछ देशों के लगभग 10,000 विद्यालयों को भेजी जा रही है जिससे
लगभग 50,000 शिक्षक इसका लाभ उठा पाएँगे। इस पत्रिका द्वारा शिक्षकों को प्राप्त होंगी-
- हिंदी-शिक्षण के लिए नवीन उपयुक्त विधियाँ
- नवाचार (new innovations) तथा कंप्यूटर आधारित शिक्षण
- व्याकरण तथा भाषा-विकास
- विभिन्न स्तरों के सिलेबस आधारित दिशा-निर्देश
- विभिन्न बोर्ड परीक्षाओं से संबंधित सूचनाएँ
‘मधु संबोध’ शिक्षक-शिक्षिकाओं की अपनी पत्रिका है अतः उनके सृजन को प्रोत्साहन
देने के लिए उनकी कविताएँ, गद्य-रचनाएँ भी प्रकाशित की जा रही हैं।
‘मधु संबोध’ पत्रिका का प्रत्येक अंक शिक्षकों के कक्षा-शिक्षण में संदर्भ सामग्री
के रूप में उपयोगी होगा। इस रोचक और सूचनाप्रद त्रैमासिक (quarterly) पत्रिका की सदस्यता
के लिए प्रति वर्ष केवल 100 रु. का अंशदान (subscription) देकर लाभ उठाएँ।
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अन्य किसी सूचना या पूछताछ के लिए कृपया हमसे संपर्क करें।