Event

हिंदी दिवस 2020

posted by: 2020-Sep-14

हिंदी दिवस 2020

प्रतिवर्ष मधुबन एजूकेशनल बुक्स श्री हिमांशु गुप्ता (प्रबंध निदेशक) एवं श्री दिनेश झुनझनुवाला (चेयरमैन) के मार्गदर्शन में 14 सितंबर को हिंदी दिवस का आयोजन करता आया है। इस वर्ष भी मधुबन एजूकेशनल बुक्स द्वारा 14 सितंबर, 2020 को हिंदी दिवस के अवसर पर वर्चुअल मंच के माध्यम से अखिल भारतीय कार्यक्रम ‘हिंदी हैं हम’ आयोजित किया गया, जिसमें देश भर के पाँच सौ से अधिक शिक्षकों एवं शिक्षाविदों ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन मधुबन की प्रबंध संपादिका डॉ. योगिता भाटिया ने किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु थे। इसके साथ ही अन्य गणमान्य व्यक्तियों एवं भाषाविदों ने विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित होकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। प्रमुख शिक्षाविद् डॉ. उषा शर्मा (प्रोफ़ेसर, एन.सी.ई.आर.टी.), प्रो. सरोज शर्मा (प्रोफ़ेसर, इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय) तथा डॉ. पवन सुधीर (प्रोफ़ेसर, एन.सी.ई.आर.टी.) ने ‘हिंदी : एक दृष्टि’ विषय पर विचार गोष्ठी में अपने-अपने विचार व्यक्त किए।

‘मधुबन एजूकेशनल बुक्स’ के व्यवसाय प्रमुख श्री नवीन राजलानी ने माननीय उपराष्ट्रपति श्री वेंकैया नायडु का स्वागत करते हुए उनसे देश भर से जुड़े अध्यापकों के नाम अपना संदेश देने का आग्रह किया। श्री वेंकैया नायडु ने हिंदी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज ही के दिन 1949 में हमारी संविधान सभा ने हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। इसी वर्ष 26 नवंबर को संविधान सभा में अपने समापन भाषण में डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी ने इसका महत्व बताते हुए कहा था कि पूरे देश ने पहली बार अपने लिए एक राजभाषा को स्वीकार किया है। जिनकी भाषा हिंदी नहीं है, उन्होंने भी इसे राष्ट्रनिर्माण के लिए राजभाषा के रूप में स्वीकार किया है। श्री नायडु ने महात्मा गांधी जी का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने सन 1944 में अपने एक लेख में कहा था कि क्षेत्रीय भाषाओं की नींव पर ही राष्ट्रभाषा की भव्य इमारत खड़ी होगी। राष्ट्रभाषा और क्षेत्रीय भाषाएँ एक-दूसरे की पूरक हैं, विरोधी नहीं। श्री नायडु ने कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद और महात्मा गांधी जी द्वारा सुझाया मार्ग ही हमारी भाषायी एकता को सुदृढ़ कर सकता है। उन्होंने आगे कहा कि हमें न तो किसी भाषा को थोपना चाहिए और न ही किसी भाषा का विरोध करना चाहिए। हर भारतीय भाषा वंदनीय है। श्री नायडु ने बच्चों की शिक्षा के माध्यम के रूप में मातृभाषा के प्रयोग पर भी ज़ोर दिया।

इस अवसर पर माननीय उपराष्ट्रपति जी ने हिंदी को बढ़ावा देने वाले देश भर के शिक्षक-शिक्षिकाओं और मेधावी छात्रों को पुरस्कृत करने के लिए ‘मधुबन एजूकेशनल बुक्स’ की सराहना की। उन्होंने सभी शिक्षकों एवं छात्रों से अपनी मातृभाषा का सम्मान करने का आग्रह भी किया। अपना अनुभव बताते हुए श्री नायडु ने कहा कि वे बचपन में हिंदी नहीं सीख पाए, लेकिन आगे चलकर उन्हें यह मानना पड़ा कि भारत में हिंदी के बिना आगे बढ़ना संभव नहीं है।

माननीय उपराष्ट्रपति जी के संदेश के पश्चात ‘हिंदी : एक दृष्टि’ विषय पर विचार गोष्ठी में भाषाविदों ने नई शिक्षा नीति के संदर्भ में भाषा-शिक्षण के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला।

विचार गोष्ठी के उपरांत काव्य गोष्ठी में सुप्रसिद्ध कवि श्री दिविक रमेश, श्री श्याम सुशील तथा श्री लक्ष्मी शंकर वाजपेयी ने अपनी-अपनी कविताओं का पाठ किया। काव्य गोष्ठी का संचालन दामिनी यादव जी ने किया।

कीर्ति तोलानी ने सम्मानित अध्यापकों के बारे में चर्चा की एवं 200 अध्यापकों एवं 300 बच्चों को सम्मानित किया गया।

© Copyright 2020 madhubun books. All Right reserved.