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Surili Hindi Bodhmala

Dreamcatcher (An English Reader)

Transitions - History And Civics ICSE Class 9

Baaton Ki Fulwari

author: श्री वीरेंद्र जैन शिक्षाशास्त्री , हिंदी संपादक मंडल

Supporting Material: Available

बातों की फुलवारी सहायक पुस्तकमाला है। इसके आठ खंड हैं। इनका निर्माण कक्षा एक से आठ तक के शिक्षार्थियों की पठन-पाठन क्षमता और रुचियों को ध्यान में रखते हुए किया गया है। इस पुस्तकमाला का लक्ष्य है शिक्षार्थियों में पाठ्यपुस्तकों के अतिरिक्‍त अन्य पठन सामग्री को पढ़ने के प्रति ललक पैदा करना। इस पुस्तकमाला में अस्सी से अधिक लेखकों की रचनाएँ हैं। रचनाकारों की तरह हिंदी गद्य और पद्य की विविधता है। मसलन—चित्रकथाएँ, कविताएँ, कहानियाँ, निबंध, यात्रावृत्‍तांत, संस्मरण, रिपोर्ताज, फ़िल्मजगत, खेलजगत, हास्यकथाएँ, जीवनी अंश, उपन्यास अंश, आत्मकथांश, पत्र, देश-विदेश से जुड़े जानने योग्य विभिन्न तथ्य। संपूर्ण पठन सामग्री बच्‍चों की दुनिया से जुड़ी हुई है। आकर्षक चित्रांकन के साथ जिज्ञासा उत्पन्न करनेवाली और मनोरंजन करनेवाली चित्रकथाएँ हैं तो एक बार पढ़ते ही याद रह जानेवाली कविताएँ। पाठकों से मित्रवत नाता जोड़ती कहानियाँ हैं तो उनके मन में उठते विभिन्न सवालों के जवाब देती अन्य रचनाएँ। सभी रचनाओं के शीर्षक आकर्षक हैं। भाषा सरल और सहज है। रचनाओं में पिरोए गए विचार सहजता से बोधगम्य हैं। छोटी-सी बात के अंतर्गत उपयोगी सुझाव हैं तो रचना से आगे के माध्यम से शिक्षार्थियों के रचनात्मक विकास में सहायक गतिविधियाँ, रचना की बात द्वारा शब्दार्थ और मूल्यपरक प्रश्‍न दिए गए हैं तो नैतिक विकास में उपयोगी सामग्री भी।

 

इस पुस्तकमाला का उपयोग रचनात्मक मूल्यांकन के लिए भी किया जा सकता है। इसमें दी गईं विभिन्न रचनात्मक गतिविधियाँ शिक्षार्थियों के रचनात्मक मूल्यांकन में सहायक हो सकती हैं। शिक्षार्थियों पर पठन-पाठन का अतिरिक्‍त ‌अधिक बोझ न पड़े इसलिए इस पुस्तकमाला में रचनाओं की संख्या कम रखने के साथ ही आरंभिक कक्षाओं के लिए उपयोगी पुस्तकों में किसी भी रचना को अधिकतम दो और माध्यमिक कक्षाओं की पुस्तकों में तीन पृष्‍ठों में समेटने का प्रयास किया
गया है। अक्षर बड़े टाइप में और पर्याप्‍त दूरी पर रखे गए हैं ताकि शिक्षार्थियों को पढ़ने में
असुविधा न हो।

बातों की फुलवारी के बहाने दो बातें अतिरिक्‍त पठन की उपयोगिता से संबंधित भी की जा सकती हैं— अतिरिक्‍त पठन मनोरंजन और ज्ञान का श्रेष्‍ठतम सामंजस्य है। कई विधाएँ पढ़ने और सीखने का अवसर देता है। साहित्य से जोड़ने में सहायक होता है। ध्यान केंद्रित करने के अभ्यास में सहायक होता है। रचना पाठ के अधिक अवसर उपलब्‍ध कराता है। संकोच प्रवृत्‍ति से मुक्‍त करने में सहायक होता है। श्रवण कौशल का विकास करता है। कल्पनाशक्‍ति में विकास की अहम सीढ़ी माना जाता है। शब्दज्ञान वृद्‌धि और भाषा ज्ञान वृद्‌धि में सहायक होता है। जीवन मूल्यों को स्वतः सीखते जाना संभव बनाता है। और अंततः चिरस्थायी ज्ञान दे जाता है।

About Author

बातों की फुलवारी पुस्तकमाला की आठों किताबों का संकलन और संपादन श्री वीरेंद्र जैन के निर्देशन में मधुबन के हिंदी संपादक मंडल ने किया है। श्री वीरेंद्र जैन हिंदी के जाने-माने लेखक और पत्रकार हैं। एनसीआरटी की पाठ्यपुस्तक निर्माण समिति के सदस्य रहे हैं और संप्रति मधुबन एजूकेशनल बुक्स में प्रबंध संपादक हैं। इन पुस्तकों के लिए चित्रों का निर्माण ख्यातिप्राप्‍त चित्रकारों ने किया है।

About the Series

बातों की फुलवारी सहायक पुस्तकमाला है। इसके आठ खंड हैं। इनका निर्माण कक्षा एक से आठ तक के शिक्षार्थियों की पठन-पाठन क्षमता और रुचियों को ध्यान में रखते हुए किया गया है। इस पुस्तकमाला का लक्ष्य है शिक्षार्थियों में पाठ्यपुस्तकों के अतिरिक्‍त अन्य पठन सामग्री को पढ़ने के प्रति ललक पैदा करना। इस पुस्तकमाला में अस्सी से अधिक लेखकों की रचनाएँ हैं। रचनाकारों की तरह हिंदी गद्य और पद्य की विविधता है। मसलन—चित्रकथाएँ, कविताएँ, कहानियाँ, निबंध, यात्रावृत्‍तांत, संस्मरण, रिपोर्ताज, फ़िल्मजगत, खेलजगत, हास्यकथाएँ, जीवनी अंश, उपन्यास अंश, आत्मकथांश, पत्र, देश-विदेश से जुड़े जानने योग्य विभिन्न तथ्य। संपूर्ण पठन सामग्री बच्‍चों की दुनिया से जुड़ी हुई है। आकर्षक चित्रांकन के साथ जिज्ञासा उत्पन्न करनेवाली और मनोरंजन करनेवाली चित्रकथाएँ हैं तो एक बार पढ़ते ही याद रह जानेवाली कविताएँ। पाठकों से मित्रवत नाता जोड़ती कहानियाँ हैं तो उनके मन में उठते विभिन्न सवालों के जवाब देती अन्य रचनाएँ। सभी रचनाओं के शीर्षक आकर्षक हैं। भाषा सरल और सहज है। रचनाओं में पिरोए गए विचार सहजता से बोधगम्य हैं। छोटी-सी बात के अंतर्गत उपयोगी सुझाव हैं तो रचना से आगे के माध्यम से शिक्षार्थियों के रचनात्मक विकास में सहायक गतिविधियाँ, रचना की बात द्वारा शब्दार्थ और मूल्यपरक प्रश्‍न दिए गए हैं तो नैतिक विकास में उपयोगी सामग्री भी।

 

इस पुस्तकमाला का उपयोग रचनात्मक मूल्यांकन के लिए भी किया जा सकता है। इसमें दी गईं विभिन्न रचनात्मक गतिविधियाँ शिक्षार्थियों के रचनात्मक मूल्यांकन में सहायक हो सकती हैं। शिक्षार्थियों पर पठन-पाठन का अतिरिक्‍त ‌अधिक बोझ न पड़े इसलिए इस पुस्तकमाला में रचनाओं की संख्या कम रखने के साथ ही आरंभिक कक्षाओं के लिए उपयोगी पुस्तकों में किसी भी रचना को अधिकतम दो और माध्यमिक कक्षाओं की पुस्तकों में तीन पृष्‍ठों में समेटने का प्रयास किया
गया है। अक्षर बड़े टाइप में और पर्याप्‍त दूरी पर रखे गए हैं ताकि शिक्षार्थियों को पढ़ने में
असुविधा न हो।

 

बातों की फुलवारी के बहाने दो बातें अतिरिक्‍त पठन की उपयोगिता से संबंधित भी की जा सकती हैं— अतिरिक्‍त पठन मनोरंजन और ज्ञान का श्रेष्‍ठतम सामंजस्य है। कई विधाएँ पढ़ने और सीखने का अवसर देता है। साहित्य से जोड़ने में सहायक होता है। ध्यान केंद्रित करने के अभ्यास में सहायक होता है। रचना पाठ के अधिक अवसर उपलब्‍ध कराता है। संकोच प्रवृत्‍ति से मुक्‍त करने में सहायक होता है। श्रवण कौशल का विकास करता है। कल्पनाशक्‍ति में विकास की अहम सीढ़ी माना जाता है। शब्दज्ञान वृद्‌धि और भाषा ज्ञान वृद्‌धि में सहायक होता है। जीवन मूल्यों को स्वतः सीखते जाना संभव बनाता है। और अंततः चिरस्थायी ज्ञान दे जाता है।

Baaton Ki Fulwari-1

Baaton Ki Fulwari-1

isbn
9789325981409
price
100

Baaton Ki Fulwari-2

Baaton Ki Fulwari-2

isbn
9789325981416
price
105

Baaton Ki Fulwari-3

Baaton Ki Fulwari-3

isbn
9789325981423
price
110

Baaton Ki Fulwari-4

Baaton Ki Fulwari-4

isbn
9789325981430
price
115

Baaton Ki Fulwari-5

Baaton Ki Fulwari-5

isbn
9789325981447
price
130

Baaton Ki Fulwari-6

Baaton Ki Fulwari-6

isbn
9789325981454
price
140

Baaton Ki Fulwari-7

Baaton Ki Fulwari-7

isbn
9789325981461
price
160

Baaton Ki Fulwari-8

Baaton Ki Fulwari-8

isbn
9789325981478
price
170

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Baaton Ki Fulwari

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