product detail

Sulekh Chitramala

author: Sanyukta Ludhra

Supporting Material: Available

सुलेख या सुंदर लेख एक कला है। निरंतर अभ्यास से इस कला को निखार सकते हैं। सुंदर लेख हर किसी को आकर्षित करता है। सुंदर लेख में अक्षरों की बनावट पर बहुत ध्यान दिया जाता है। इस सुलेख पुस्तिका में लिखने के लिए भिन्न-भिन्न प्रकार की सामग्री दी गई है। रुचि उत्पन्न करने के लिए विभिन्न तरह के खेलों और गतिविधियों का समावेश किया गया है। पहले सरल फिर कठिन रूप सिखाए गए हैं। लेखन के सभी पक्षों पर बल दिया गया है। संयुक्‍त ‌व्यंजन सिखाने के लिए मानक रूप प्रयुक्‍त किए गए हैं। सरल और सरस भाषा प्रयुक्‍त की गई है और चित्रों के माध्यम से विषय का ज्ञान दिया गया है।

About Author

इस श्रृंखला का निर्माण श्रीमती कनुप्रिया और श्रीमती संयुक्‍ता लूदरा भूतपूर्व रीडर, एन.सी.ई.आर.टी. ने किया है।

About the Series

सुलेख या सुंदर लेख एक कला है। निरंतर अभ्यास से इस कला को निखार सकते हैं। सुंदर लेख हर किसी को आकर्षित करता है। सुंदर लेख में अक्षरों की बनावट पर बहुत ध्यान दिया जाता है। इस सुलेख पुस्तिका में लिखने के लिए भिन्न-भिन्न प्रकार की सामग्री दी गई है। रुचि उत्पन्न करने के लिए विभिन्न तरह के खेलों और गतिविधियों का समावेश किया गया है। पहले सरल फिर कठिन रूप सिखाए गए हैं। लेखन के सभी पक्षों पर बल दिया गया है। संयुक्‍त ‌व्यंजन सिखाने के लिए मानक रूप प्रयुक्‍त किए गए हैं। सरल और सरस भाषा प्रयुक्‍त की गई है और चित्रों के माध्यम से विषय का ज्ञान दिया गया है।

Sulekh Chitramala- Praveshika

सुलेख या सुंदर लेख एक कला है। निरंतर अभ्यास से इस कला को न More..

isbn
9788125917687
price
154

Sulekh Chitramala-1

सुलेख या सुंदर लेख एक कला है। निरंतर अभ्यास से इस कला को न More..

isbn
9788125917694
price
175

Sulekh Chitramala-2

सुलेख या सुंदर लेख एक कला है। निरंतर अभ्यास से इस कला को न More..

isbn
9788125917700
price
175

Sulekh Chitramala-3

सुलेख या सुंदर लेख एक कला है। निरंतर अभ्यास से इस कला को न More..

isbn
9788125917717
price
154

Sulekh Chitramala-4

सुलेख या सुंदर लेख एक कला है। निरंतर अभ्यास से इस कला को न More..

isbn
9788125917724
price
185

Sulekh Chitramala-5

सुलेख या सुंदर लेख एक कला है। निरंतर अभ्यास से इस कला को न More..

isbn
9788125917731
price
185

Recently viewed

Sulekh Chitramala

© Copyright 2020 madhubun books. All Right reserved.